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कोरोना वायरस अभिशाप या वरदान।। corona virus curse or boon

कोरोना वायरस अभिशाप  या वरदान।।       

  शीर्षक देखकर कोई भी ये सोच में पड़ सकता है कि कोई कोरोना नामक वायरस  के लिए वरदान शब्द का इस्तेमाल भी कैसे कर सकता है। जी हां आपका सोचना एकदम सही है कोरोना भला वरदान कैसे हो सकता है। जिसने सारी दुनिया मे हर तरफ त्राहि त्राहि मचा रखी हो। एक ऐसा विषाणु जो अगर सावधानी न बरती जाये तो किसी भी जीवित या निर्जीव वस्तु (जिसमे वो वायरस हो) के संपर्क में आते ही मानव शरीर मे प्रवेश कर जाता है। यह वायरस किसी कि जात धर्म देखकर नही हो रहा। यहाँ सुरक्षा हटी और दुर्घटना घटी वाली कहावात चारितार्थ हो रही है। ये तो गनीमत है की अभी तक पशु पक्षियों द्वारा ये फ़ैल नहीं रहा नहीं तो स्तिथी और भी  भयावह हो जाती।।

              जिस विषाणु की वजह से हर देश मे लोगो के मरने की संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है।  जिस विषाणु की वज़ह से हर देश के इकॉनमी में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। वैश्विक मंदी के आसार नजर आ रहे है। लोग बेरोजगार हो रहे है। उस कोरोना वायरस के लिए वरदान शब्द का इस्तेमाल भी किसी बड़े श्राप से कम नही है। कोरोना वायरस जिसकी वजह से कई देशो कि अर्थव्यवस्था चरमरा सी गई है। कोरोना कि वजह से लोग एक दूसरे को छूने से डर रहे है। एक दूसरे के करीब जाने से डर रहे है। एक दूसरे के साथ घूम फिर नही सकते।।

               रोजमर्रा के ज़रूरी वस्तुओँ को छोड़ दिया जाए तो हर तरह का कारोबार लगभग बंद सा हो गया है। हर देश इस विषाणु  का एंटीडोज़ बनाने में लगा हुआ है।इसके वेक्सीन जल्द से जल्द तैयार हो जाये इसलिए लगातार कई फार्मा लैब में इसपर रिसर्च किये जा रहे है। साइंटिस्ट इसका इलाज ढूंढने में लगे है। उम्मीद है जल्द ही उन्हें इसमे सफलता भी मिल जाये।।


                देखा जाए तो कई दशकों बाद ऐसी कोई बीमारी आई है जिसका इलाज ईतने दिन गुजर जाने के बावजुद भी अभि तक मिल नाही पाया। ये  बिमारी किसी एक देश की बात न होकर पूरी दुनिया के लिए सरदर्द बनी हुई है। अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश भी अभी तक इसपर इलाज नही खोज पाया है। बल्कि इतने शक्तिशाली देश को भी इस कोरोना वायरस जैसी बीमारी से निपटने के लिए शुरवाती इलाज के तौर पे ही सही लेकिन भारत देश में बनने वाली दवाई हाईड्रॉक्सि-क्लोरोक्विन जो मलेरिया नामक बीमारी में इस्तेमाल होती है। उसका बहोत बड़ी मात्रा में आयात करना पड़ रहा है। इससे ये भी साबित होता ही है कि कोई भी देश पूर्णरूप से परिपूर्ण नही होता चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कितनी भी मजबूत क्यो न हो।।

                                 चाइना जहा से इस बीमारी की शुरुवात हुई उसके बारे में अलग अलग न्यूज़ चैंनलों में,अखबारो और सोशल मीडिया पे कई तरह की खबरे आ रही है। कोई कहता है कि चमगादड़ से ये वायरस आया तो कोई कह रहा है कि किसी परीक्षण के दुष्परिणाम स्वरूप इस वायरस का जन्म हुआ है। हालांकि ये वायरस सजीव नही है। ये वायरस चाहे जैसे भी आया हो लेकिन शरीर मे जाने पर इसका दुष्प्रभाव इतना भयानक हो रहा है कि

लोगो को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ रहा है। वही चाइना की और से कभी ये कहा जाता है कि चाइना के जिस वुहान शहर से इस वायरस की शुरुवात हुई थी वहा  अभी पुरी तरह इस बिमारी कंट्रोल पा लिया गया है। वही कुछ खबरों की माने तो चाइना जानबूझकर ऐसे स्टेटमेंट दे रहा है ताकि बाकी विश्व का ध्यान उससे हट जाए। जबकि इसके विपरीत तमाम सोशल मीडिया पे कहा ये भी जा रहा है कि चाइना में इस बीमारी से मरने वालो कि संख्या लाखो में है। क्या सच क्या झूठ हम इस बहस में नाही पड़े तो बेहतर है।।

              सच सिर्फ ये है कि पूरे विश्व मे लगभग हर देश के डॉक्टर हर प्रकार से इस कोरोना नाम की बिमारी से ग्रसित मरीजों का इलाज करने में लगे हुए है। उनके इन प्रयासों से काफी कोरोना ग्रसित लोग ठीक भी हुए है। इसमें कोई दो राय नही। लेकिन जो प्रॉपर वैक्सीन चाहिए इस बीमारी से निज़ात दिलाने वो अभी तक किसी भी देश के पास नही है। रोगीयों की संख्या बढ़ने के साथ साथ अब तो इस वायरस से ग्रसित लोगो के मृत्यु का प्रमाण भी बढ़ते ही जा रहा है।।

              इसलिये दुनिया का हर देश इसी कोशिश में लगा है कि जितनी जल्दी हो सके इसका इलाज मिल जाये। इस बीमारी की वजह से लोग अपने ही घरों में कैद हो गए है।बाकी देशो का तो पता नही लेकिन भारत देश मे  ऐसे भी काई लॉग है जिनका तो कोई घर ही नही सड़क किनारे जिनके आशियाने थे फुटपाथ ही जिनका घर था। उन बेचारो की अपनी अलग मुश्किले बड़ी हुई है। लॉकडाउन कि वजह से उनके खाने के भी लाले पड़े हुए है।।

 भारत देश और कोरोना वायरस।।

                                                  भारत देश मे भी इस बीमारी का प्रमाण बढ़ते देखा जा रहा है। लेकिन शुक्र है हमारे देश के प्रधानमंत्री और सारे राज्यो के मुख्यमंत्रियों का जिन्होंने समय रहते इस भयानक बिमारी को अधिक फैलने से पहले ही लॉकडाउन जैसी यवस्था लगाकर इसे कंट्रोल करने की शुरुवात कर दी थी। जो अभी भी जारी है। हालांकि इस तरह के अचानक लिए हुए फैसले से काफी लोगो को तकलीफ झेलनी पड़ रही है। ख़ासकर मजदूर वर्ग के लोगो को जो अपने अपने राज्यो को छोड़कर दूसरे राज्यो में फंसे पड़े है। जहाँ उन्हें रोजगार से लेकर रहने खाने की तकलीफे झेलनी पड़ रही है। और इस भयानक त्रासदी के समय वो अपने घरवालों से मिल भी नही पा रहे। बावजूद इसके हर राज्य की सरकार और वहा के मुख्यमंत्रियों द्वारा इन मजदूरों की रहने खाने की व्यवस्था करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।।

                  लेकिन देश मे एक वर्ग ऐसा भी है जो इन मजदूर वर्ग से थोड़ा ऊपर और मिडिल क्लास से थोड़ा नीचे आता है। जिसे लोअर मिडिल क्लास कहा जाता है। सबसे ज्यादा तो परेशानी इन लोगो के साथ है। ये वो लोग होते है जो प्राइवेट नौकरियां जरूर करते है लेकिन महीने की पगार से ही इनका घर खर्च चलता है। ईसके अलावा इनके पास पैसा कमाने का कोई और साधन नही होता। छोटे छोटे दुकानदार जो अगर रोज़ दुकान न खोले तो उनकी आवक बंद हो जाये।और भी कई ऐसे लोग है जिनकी आजीविका ही रोजमर्रा के धंधे पानी से होती है। जो थोड़ा बहोत पैसा था राशन लाने में लगा दिया इनमे से ज्यादातर लोग किराये के मकानों में रहते है। तो सब मिलाजुलाकर ढाक के तीन पात। इनके साथ दिक्कत ये है कि ये कही राशन की सिफारिश नही कर पाते और चाहकर भी असहजतावश अपनी तकलीफ किसी को बता नही पाते। गुजारिश है हर राज्य की सरकारो ने इन लोगो पर भी ध्यान  देना चाहिए ऐसे लोअर मिडिल क्लास हर जगह होते है लेकिन खासकर मुम्बई, पूना जैसे मेट्रो शहरो में जो हर राज्य में मौजूद है यही ये लोअर मिडिल क्लास फॅमिली ज्यादा होती है।।

                 देश पर इस बीमारी के साथ साथ आर्थिक संकट भी आया है। कोरोना खत्म होने के बाद वो एक और लड़ाई हम सब को मिलकर लड़नी होगी। यह कोरोना नाम का ऐसा श्राप है जिसे हमसबने मिलकर हटाना है।।

कोरोना नामक इस बीमारी के श्राप और उसके दुष्परिणामो के बारे में हमने काफी चर्चा कर ली। ऐसे और भी कई दुष्परिणाम है इस बीमारी के जिसने भारत सहित दुनिया के बाकी देशों में भी भयानक त्रासदी ला खड़ी की है।।


अब हम इसके वरदान वाले पहलू के बारे में भी थोड़ी बात कर ले।।

                 कई लोगों का कहना है कि ये प्रकृति से खिलवाड़ का नतीजा है जो सारी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। प्रक्रति ने फिर एक बार दिखा दिया कि वो जब चाहे इंसानो को घुटनों पे ला सकती है। फिर इंसान चाहे कितना भी प्रगतिशील क्यो न हो जाये। साइंस चाहे कितनी भी तरक्की क्यो न कर ले लेकिन प्रकृती के आगे हम इन्सानो कि औकात शून्य मात्र ही है।

                 कहते है आज हवा में ताज़गी का अनुभव होता है। पॉल्यूशन कंट्रोल में आ गया, वही सागर और नदियों में डाले जाने वाला कूड़ा करकट भी ऑलमोस्ट खत्म हो गया है। फ़ैक्टरीया बंद होने से भारत देश मे कई सालों बाद गंगा और यमुना नदी का पानी साफ देखा गया है।।

जो लोग आधुनिकरण के इस युग इतने व्यस्त हो गये की कभी परिवार को समय नही देते थे आज वो भी अपने परिवार के साथ समय बिता रहे है।।

हाथ धोने से लेकर खांसते वक़्त मुँह पर रुमाल रखना तक हम भूल गए थे। कोरोना ने हमे फिर से इन सब बातों की आदत लगा दी।।

जंकफूड या होटल से खाना खाने की परंपरा भी कोरोना की वजह से टूट गई । अब लोगो की सेफ्टी इसी में है कि वो घर का बना खाना ही खाये। अमीर हो या गरीब ये बात सभी को लागू हो गई।

कोरोना ने दहशत क्या होती है ये पूरे विश्व को दिखा दिया है। चाहे फिर वो पूर्ण समृद्ध देश हो या सबसे कमजोर।

दुनिया के हर देश के इंसानो को इसकी दहशत का पता चल गया है। जो दहशत शायद तीसरे विश्वीयुद्ध होने की  भी कभी न रही हो।

कोरोना ने ज़िन्दगी की अहमियत से हर देश के नागरिकों को अवगत कराया है। इस बिमारी से मुकाबला करने  के लिये शरीर कि इंम्युन सिस्टम का मजबूत होना कितना जरुरी है। ये भी हमे अब समझ आ रहा है। इसी तरह और भी कई बाते है जो कोरोना वायरस की वजह से दुनिया मे पहली बार हो रही है।

           जहां ये कही न कही मानव जाति पर कोरोना वायरस की वजह से अंजाने मे मिला हुआ वरदान भी अगर लगे फिर भी मेरा ये मनना है इससे बड़ा अभिशाप कोई हो ही नही सकता जो इंसानो की ज़िन्दगियों से खेल रहा है। उन्हें निगल रहा है। मैं विश्व के उन तमाम डॉक्टर,नर्स,पुलिसमैन,बैंक कर्मचारी, सफाई कर्मचारी, और वो सारे लोग जो इस मुश्किल घड़ी में अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना मरीजों और इस त्रासदी मे फंसे हुए लोगो की सेवा कर रहे है उन सभी का तहे दिल से कोटि कोटि धन्यवाद करती हूं।और उम्मीद करती हूं कि जल्दी ही हम इस संकट की घड़ी से बाहर निकलकर सुचारू ज़िन्दगी से रूबरू हो जायेगे।।

             

और सभी लोगो से निवेदन है कि जैसा कि प्रधानमंत्री जी और सारे राज्यो के मुख्यमंत्रियों ने कहा है। की लॉकडाउन के दरमियान आप सभी अपने अपने घरों में ही रहिये। अफवाओं पे ध्यान न दे सिर्फ सरकार के द्वार जारी किये दिशा निर्देशों का पालन करे। इस लड़ाई में सरकार का पूरी तरह से साथ दे। सोशल डिस्टसींग बनाये रखिये। तभी हम इस बीमारी को फैलने से रोक पाएंगे। और हमारे खुद के घर से ज्यादा सुरक्षीत और कोई जगह हो ही नही सकती इसलिए फिर एक बार निवेदन है घर पे रहिये सुरक्षित रहिये

stay home stay safe 

     “वरना ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा” 

कोरोना वायरस (covid 19) के शुरवाती लक्षण

1) तेज बुखार आना

2) सुखी खांसी

3) सांस लेने में तकलीफ

4) गले मे ख़राश

उम्मीद है आपको ज्ञात हो गया होगा कि इस लेख के शीर्षक में कोरोना को अभिशाप या वरदान क्यो कहा गया है।।

उपरोक्त (लेख) में जो भी जानकारी मैने शेयर की है वो मेरे अपने निजी विचार है। जो न्यूज़, अखबारों और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई जानकारी के आधार पे है। फिर भी इस लेख में किसी प्रकार की त्रुटि हो तो क्षमापार्थी।।

धन्यवाद।।

ममता सरदारे {BEAUTICIAN}  

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