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corono virus covid-19:मानवरूपी भगवान-संक्रमित लोगो का अपमान करता समाज

मानवरूपी भगवान और संक्रमित लोगो का अपमान करता समाज

 विश्व स्वाथ्य संगठन(WHO )ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित तो कर ही   दिया है,विश्व के लगभग हर देश के नागरिक  इस वायरस से होनेवाली बीमारी के डर से  दहशत में जी रहे है.  और खबरों की माने तो इस बीमारी की वजह से विश्व में अब तक लगभग 2.50  लाख से भी ज्यादा  और भारत देश में लगभग 1500  से ऊपर लोगो की जाने  जा चुकी है.

कोरोना औरअछूत होता समाज। 

आज देश दुनिया हर तरफ एक ही चर्चा का विषय है कोरोना वायरस covid 19 सारी दुनिया मे इस कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी और उसके इंसानी शरीर पर होनेवाले  अलग अलग दुष्प्रभाव देखे  जा रहे है। लोगो मे डर का माहौल सा बना हुआ है कि कही यह  बीमारी उन्हें भी न हो जाये।

इस बीमारी को लेकर सोशल मीडिया में कई तरह के लेख और वीडिओज़ आ चुके है  सरकार द्वारा जारी किए गए कुछ  लेख और वीडिओज़ को छोड़ दिया जाये तो अधिकतर मामलों में अफवाहें ही ज्यादा है और कई लोग ऐसे भी जो इन अफवाहों को सच मान कर  इनपर भरोसा भी करने लगते है।  जिसकी वजह से लोगो में इस बीमारी के होने और इस बीमारी के इलाज के सम्बन्ध में अलग अलग भ्रांतियां  बनी  हुए है ।

world health organisation (WHO ) ने इस बीमारी से बचने  का सबसे अच्छा और सबसे कारगर उपाय बताया  की हम सोशल डिस्टन्सिंग रखते  हुए अपने घरो में ही रहे और जब तक बहोत ज्यादा जरुरत न हो घर से बाहर न निकले,और जितना ज्यादा हो सके रोग प्रतिरोधक शक्तिया बढ़ाने वाले  खाद्य पदार्थो का सेवन अधिक से अधिक मात्रा में करे  जिससे  शरीर के अंदर का इम्यून सिस्टम अधिक मजबूत होगा जो ना सिर्फ कोरोना  बल्कि और भी कई तरह की बीमारियों से लड़ने के लिए  सक्षम होगा।

खबरों की माने तो अगर गलती से किसी व्यक्ति को कोरोना हो भी गया हो तो मानो उस  कोरोना ग्रसित व्यक्ति पर  पहाड़ ही टूट पड़ा हो पिछले दिनों ऐसे ही कुछ वाक्यात सामने आये है कुछ शहरो में  घटित हुइ  घटनाओं में ऐसा देखा गया है की कोरोना ग्रसित व्यक्ति हो या कोरोना से लड़कर पूरी तरह स्वस्थ  होकर घर वापस आया व्यक्ति, उस व्यक्ती के घर के आसपास के पड़ौसियों द्वारा  ऐसे व्यक्ती के परिवार  को पूरी तरह से बहिष्कृत सा कर दिया है जैसे मानो उस परिवार ने कोई बड़ा पाप कर दिया हो,यह  कहा तक उचित है,

यह  ऐसी बीमारी है की यदि पूरी तरह से  सावधानी ना  बरती गई तो ये कभी भी,कही भी,किसी को भी हो सकती है,इस बात की क्या गारंटी  है की आनेवाले समय में यह बीमारी उन पड़ौसियों में से किसी को होगी ही नहीं, क्या पता  कल उन  सारे पड़ौसियों  में से गलती से यह बीमारी किसी एक  को हो गई तो कल उनके साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया जायेगा। 

देखा जाये तो ये वक़्त नफ़रत करने का या ऐसे कोरोना बाधित व्यक्तियों को हिक़ारत  भरी नज़रो से देखने का नहीं बल्कि मानसिक रूप से ऐसे लोगो के साथ खड़े रहने का और उन्हें इस बीमारी से लड़ने के लिए हिम्मत  देने  का है।

  ये सिर्फ किसी एक देश की बात नही ये पूरे विश्व की  परेशानी  है। इस बीमारी ने भय का ऐसा वातावरण निर्माण  कर दिया है कि लोग ना चाहते हुये भी एक दूसरे को शक की नज़र से देखने लगे है, छूने से डरने लगे है,कोरोना नामक इस  बीमारी ने एक ऐसी अस्पृश्यता को जन्म दे दिया है जिसने पूरे विश्व को ही जैसे अछूत बना दिया हो। क्योकि यह बीमारी छुने से भी  फ़ैलती है। 
 इससे पहले भी स्पेनिश फ्लू, सार्स और इबोला जैसी कई  बीमारियां आई और चली भी गई। जान माल का नुकसान तो इन बीमारियों की वजह से भी काफी हुआ है लेकिन उसे वक़्त रहते संभाल भी लिया गया।उम्मीद है इस बार भी वैज्ञानिक जल्दी ही इसका इलाज ढूंढ लेंगे और  पुरे विश्व को एक बड़ी तबाही से बचा लेंगे।

 लेकिन ऐसा शायद पहली बार ही हो रहा है की लोगो को अपने ही घरो में कैद होना  पड़  रहा है कुछ एक को छोड़ दिया जाये तो सारी  सरकारी यंत्रणाए  बंद हो चुकी  है.नौबत ऐसी आ गई  की राज्यों के बिच का सड़क  परिवंहन  तक बंद हो गया हवाई मार्ग, रेल मार्ग सब बंद कर दिया गया।  सबकुछ अचानक थम सा गया किसी ने भी नहीं सोचा होगा की जीवन में  कभी उन्हें ऐसा भी दौर देखना पड़ेगा, इस तरह के हालातो का सामना करना पड़ेगा।   

हर शहर की गली मोहल्ले से लेकर विश्व के हर देशो में इस बीमारी की वजह से हाहाकर मचा हुआ है। हालाँकि कुछ देशो में  समय रहते इस पर काबू पाने (इसके फैलाव को रोकने )की कोशिश जरूर की गई  और उसमे वो कामयाब भी हो रहे है लेकिन यह इसका पूर्ण समाधान नहीं है इस बीमारी का पूरी तरह से समाधान  इसकी वैक्सीन(इलाज) आने के बाद ही मिलेगा और उस वैक्सीन की उप्लब्धता   भी पूरी दुनिया तक पहुचतें पहुचतें  वक़्त तो लगेगा ही और  न चाहते हुए  भी   उस वक़्त का इंतज़ार सभी को करना ही पड़ेगा,इसी उम्मीद के साथ की वह वक़्त जल्दी ही आ जाये।

कोरोना और मानवरूपी भगवान
भगवान  इस नाम का  शब्दों में वर्णन  कुछ इस प्रकार किया गया है.

भ से भुमि,ग से गगन,  व से वायु,  अ  से अग्नि  और न से नीर 

क़ुदरत (प्रकृति)  इन्ही पांच तत्वों  से  मिलकर बनी है और हम इंसान भी इसी  क़ुदरत का एक छोटा सा हिस्सा है।  धर्म और श्रद्धा की बात करे तो इन्सानी धर्म चाहे कितने भी प्रकार के हो लेकिन हर धर्म में   एक अन्जान   शक्ति को अपने   विश्वास के अनुरूप अलग अलग नाम दिए गये है और उनमे सबकी अपनी अपनी श्रद्धा भी है क्योकि हम सबका विश्वास है की कही तो कोई एक शक्ति है जिससे सारा संसार चलता है।

  लेकिन कोरोना बीमारी आने के बाद   हमारे मनरूपी भगवानो के मंदिरों, मस्जिदों, गिरजाघरों पर भी ताले  लगा दिए गए क्योकि यह सारे भगवान अब हर देश के डॉक्टर्स, नर्सेस में आकर बस गए जो हमे इस कोरोना नाम की बीमारी से बचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे है, इन डॉक्टर्स ,नर्सेस के अपने घर परिवार भी है  इस बीमारी के होने का जितनी  संभावना  पूरी दुनिया  के लोगो को  है उतनी  ही या शायद उससे भी ज्यादा  संभावना  इन्हे या इनके   द्वारा  इनके परिवार के सदस्यों को होने की है, बावजूद इसके यह लोग निरंतर  अपनी सेवाएं  दे रहे है.

इनके अलावा पोलिस  महक़मा,सफाई कर्मचारी, बैंक कर्मचारी  और भी ऐसी कई सेवाएं है जो देशवासियो के हित  में  हर देश के सरकारों को  मजबूरन शुरू रखनी पड़ी है ,इनमे भी  जो इंसान काम करते उन्हें और उनके परिवारों को भी तो इस बीमारी से खतरा हो सकता है लेकिन ये सब लोग भी निरंतर हमे अपनी सेवाएं दे रहे है, मान  लीजिये सफाई कर्मचारीयो ने  भी अपनी सेवाएं देना बंद कर दी  और इस बीमारी के डर से अपने अपने घरो में रहे तो क्या होगा हर तरफ गन्दगी का साम्रज्य ही होगा ,इस बीमारी के डर से बैंक कर्मचारीयो ने बैंक जाना बंद  कर दिया तो पैसो  की आवाजाही बंद हो जाएगी लोग जीवनावश्यक  वस्तुओ की खरीदफरोख्त कैसे करेंगे।

   हर देश के पोलिस मैन उनका तो रात  दिन मानो एक ही काम हो गया है, देश की हर गली चौराहो पर  उनकी दिन रात की तैनाती सिर्फ इसलिए लगाई गई है ताकि लोगो को एक दूसरे से दूर रखा जाये बेवजह  कोई घर से बाहर  ना  निकले क्योकि यह बीमारी किसी को भी कभी भी किसी भी  वस्तु के संपर्क में आने से हो सकती है ,यह सब लोग भी तो हमारे लिए भगवान की तरह ही है जो  हमारी  सुख सुविधाओं, हमारी सुरक्षा के लिए दिन रात काम पर लगे हुए है हमें तो सिर्फ इनका साथ ही देना है सरकार  द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करके।

 यह एक ऐसा युद्ध है जिसमे कोरोना वायरस  नाम का अदृश्य दुश्मन  है और हमे इसी अदॄश्य दुश्मन को हराना है जिसमे यह सारे कर्मचारी(मानवरूपी भगवान ) फ्रंट फुट पर  युद्ध लड़ रहे है हमें तो सिर्फ अपने घरो में रहकर   ही इनका हौसला बढ़ाना है।   बॉर्डर पे जाकर गोलिया चलाने से तो कई गुना बेहतर ही  है की हम घर पर ही रहकर  कोरोना नामक महामारी से युद्ध  लड़े  और जीते भी।   

कोरोना और आज़ाद पर्यावरण

पिछले  कुछ दशकों से विश्व में बढ़ते विकास के साथ  साथ  पर्यावरण में बढ़ता प्रदुषण   चिंता का विषय बना हुआ है इस बढ़ते प्रदुषण के रोकथाम के लिए हर देश की सरकार अपनी तरह से हर संभव प्रयास कर रही है. भारत देश की बात करे तो यहाँ की बढ़ती विकासशीलता की वजह से ढेरो फैक्ट्रियो का निर्माण किया गया जिसकी वजह से उन फैक्ट्रियो से निकला हुआ वेस्ट मटेरियल नदी नालो के जरिये पर्यावरण को प्रदूषित ही कर रहा था  सरकार  द्वारा किये गए तमाम प्रयासो के बावजूद फैक्ट्रियो से निकले गंदगी से प्रदुषित नदियाँ साफ ही नहीं हो पा  रही थी सागर किनारे कचरे  के ढेर ख़तम नहीं हो पा रहे थे। 

अचानक कोरोना नामक यह छोटा सा विषांणु आया और इसने जैसे सबकुछ बदलकर रख दिया   इस वायरस से होने वाली बीमारी से लोगो को बचाने के लिए सरकार  पुरे देश में लॉक डाउन लगा दिया और जैसे चमत्कार हो गया जो गंगा, यमुना नदी सरकार द्वारा सालो के प्रयासों के बावजूद भी साफ नहीं हो पा रही थी, वो गंगा और यमुना नदी का जललोखड़ौन के इन कुछ ही दिनों में साफ और निर्मल हो गया ये केवल इन दो नदियों तक ही सिमित नहीं है बल्कि हर शहरो की नदियों का यही हाल है.

सागर किनारे लगने वाला कचरे का ढेर लगभग  ख़तम हो गया,    हवा में ताजगी सी आ गई आसमान की धुंध साफ़ हो जाने से अब आसमान भी बदला बदला सा नज़र आने लगा है  ,कहा जाता है की पंजाब के कुछ शहरो से हिमालय पर्वत के चोटियों की झलक दिखने लगी है ,इतना सबकुछ हो रहा है लेकिन यह हमेशा के लिए ऐसे ही कायम रहेगा यह  कोई जरुरी नहीं आज ना  कल लॉक डाउन खुलेगा ही लोग फिर से अपने अपने काम धंधो पर लौट आएंगे फैक्ट्रिया फिर शुरू होगी और उन फैक्ट्रियों, कारख़ानो से निकलने वाली गंदगी फिर नदियों में जाकर मिलेगी उनसे निकलने वाला धुँआ फिर वातावरण को प्रदूषित करेगा और कुछ दिनों बाद सबकुछ पहले जैसा ही हो जायेगा। प्रकृति ने हमे कोरोना वायरस के रूप में अपनी गलतियों पर  लगाम लगाने का  यह  एक मौका दिया है. 

अगर अब भी समय रहते कारगर प्रबंध नहीं किये गए तो आनेवाले दिनों में प्रदूषण  का स्तर धीरे धीरे इतना बढ़  जायेगा की  चेहरे पे जो मास्क आज हम कोरोना के डर की वजह से लगा रहे है वो प्रदूषण  के बढ़ने के बाद रोजमर्रा की ज़िन्दगी का एक हिस्सा बन जायेगा और फिर किसे पता उस बढ़ते हुए प्रदूषण  से हम अपने स्वास्थ  को कितने दिनों तक सुरक्षित रख पाए.

हो सकता है की बढ़ते प्रदूषण   पर  काबू पाने का कोरोना वायरस  के रूप में कुदरत द्वारा दिया गया ये आखरी मौका हो अगर अब भी हम नहीं सम्भले तो वो दौर भी दूर नहीं होगा जब लोग कोरोना जैसे किसी बीमारी से तो बाद में मरेंगे उससे पहले शहरो का बढ़ता प्रदूषण  उनकी जान ले लेगा। 

सचमुच जरुरत है की हम इन मानवरूपी भगवानो  को  समझे, उनकी इज्ज़त  करे और अपने घरो में ही रहकर उनका साथ दे,और  संक्रमित लोगो का अपमान करने की बजाय  उनका हौसला बढ़ाये और उन्हें हिम्मत दे.   

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