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अमिताभ बच्चन अभिनीत शराबी (1984) फिल्म की सुनी-अनसुनि बातें

और सचमुच असल ज़िन्दगी में अमिताभ बच्चन के हाथ में बॉम्ब फट गया जिससे उनका हाथ बुरी तरह घायल हो गया और इस वजह से उन्हें अपने फिल्म की बाकि शूटिंग जेब में एक हाथ रखकर ही पूरी करनी पड़ी लेकिन फिल्म के रिलीज़ होने के बाद लोगो पर इसका उल्टा ही असर हुआ जिस मज़बूरी की वजह से अमिताभ को अपना बाया हाथ जेब में रखकर फिल्म की बाकी बची शूटिंग पूरी करनी पड़ी, फिल्म के हिट होते ही उनका वो स्टाइल उस वक़्त फैशन का ट्रेंड बन गया,अमिताभ बच्चन द्वारा फिल्म में निभाए किरदार की तरह ही लोगो ने एक हाथ जेब में रखकर चलना शुरू कर दिया था.  

असल में हुआ यह था की इस फिल्म की शूटिंग के दौरान आई दिपावली में घर में पटाखे जलाते वक़्त एक पटाखा बॉम्ब अमिताभ बच्चन के हाथ में ही फट गया जिसकी वजह से उनका हाथ बुरी तरह जल गया जिसे ठीक होने में काफी दिन लग जाते और अमिताभ जल्द से जल्द इस फिल्म को पूरा करना चाहते थे इस सम्बन्ध में अमिताभ और फिल्म के निर्देशक प्रकाश मेहरा ने आपस में चर्चा के बाद ये फैसला लिया की उस जले हुए हाथ को छुपाकर फिल्म की बाकि की शूटिंग पूरी की जाये इसलिए फिल्म के काफी सीन्स में अमिताभ बच्चन अपना एक हाथ जेब में रखे हुए ही नजर आये.

जीहां हम 1984 में आई प्रकाश मेहरा निर्देशित सुपरहिट फिल्म “शराबी” की बात कर रहे है, जिसमे अमिताभ बच्चन ने रईस बाप के बिगड़ैल शराबी बेटे की भूमिका निभाई थी, इस फिल्म में निभाये शराबी की बेहतरीन भूमिका से अमिताभ बच्चन ने ये साबित कर दिया था की शराबी की एक्टिंग करने के लिए शराब पीना जरुरी नही.

इस फिल्म से संबंधित एक और बात कही जाती है की फिल्म के एक मशहूर गाने मुझे नौलखा दिला दे रे… के शूटिंग के दरमियान अमिताभ बच्चन अपने किरदार में इतने ज्यादा खो गए थे की हथेली से घुँगरू बजाते हुए उनके हाथ से सचमुच खून निकल आया था और इसकी परवाह किये बिना उन्होंने अपना शूट पूरा किया था,अभिनय के प्रति उनके इस समर्पण की वजह से ही उन्हें सदी का महानायक कहा जाता है.

कहा जाता है की यह फिल्म बनाने की प्रेरणा फिल्म के डायरेक्टर प्रकाश मेहरा को लावारिस फिल्म के सेट पर एक बड़े उद्योगपति (industrialist ) से मिलने के बाद आया था जो पूरी तरह से alcoholic थे. शराबी होने के बावजूद भी वो अपने काम में एकदम परफेक्ट थे और शराब की इस लत का उनके(उद्योगपति)काम पर कभी कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा था.

जानते है इस फिल्म से जुड़ी कुछ अन्य  बाते…

इस फिल्म में जयाप्रदा ने भी मीनाजी की भूमिका में अपने अभिनय का लोहा मनवाया था, वैसे तो शराबी फिल्म का हर किरदार मशहूर हो गया था फिर चाहे रंजीत द्वारा निभाई गयी खलनायक नटवर की भूमिका हो या फिर सुरेश ओबेराय द्वारा निभाया गया गरीब अब्दुल का किरदार लेकिन इन सबके अलावा अमिताभ बच्चन के किरदार के बाद सबसे ज्यादा जो किरदार लोकप्रिय हुए वो थे मुंशी जी और नत्थूलाल। मुंशीजी की भूमिका में जहा ओमप्रकाश ने दर्शको से ढेर सारी हमदर्दी प्राप्त की थी वही नत्थूलाल(मुकरी) और उनकी मुछो ने दर्शको को हँसाने का काम किया। प्राण ने इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के पिता की भूमिका निभाई थी जो अमीर और सफल बिजनेसमैन होने के बावजूद भी अपने बेटे की परवरिश से लापरवाह रहते है और अपने बेटे की जिम्मेदारी अपने मुंशी को सौंप देते है. इस फिल्म के काफी सारे डायलॉग प्रसिद्द हुए थे उन्ही में से एक जो “मूंछे हो तो नत्थूलाल जैसी हो वरना ना हो” आज भी कई लोगो के मुँह से सुना जा सकता है. 

1984  में बनी इस फिल्म को बनाने में तक़रीबन  4 .5  करोड़ रूपये की लागत आई  थी और इसका बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 7 .5 से 8 करोड़  के आसपास हुआ  था। प्रकाश मेहरा  निर्देशित इस फिल्म के निर्माता सत्येंद्र पाल थे ,इस फिल्म के लिए किशोर कुमार को  मंजिले अपनी जगह है इस गीत के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का पुरुस्कार और बप्पी लाहिरी को सर्वश्रेष्ठ  संगीतकार  का  फिल्मफेयर  पुरुस्कार मिला था।  

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