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क्या अब कोरोना से डरने की जरुरत नहीं ?

प्लाज़मा थेरेपी/PLASMA THERAPY


नमस्कार मित्रो। 
            
              कोरोना वायरस द्वारा दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही मृत्युदर से पूरी दुनिया अपने अपने तरीके से मुकाबला कर ही रही है।जहा दूर दूर तक इस बीमारी के अंत होने का कोई निश्चित समय नज़र नहीं आ रहा। जिस वायरस का सटीक इलाज अभी तक किसी भी देश के पास नही है। ऐसे में कही से भी इस वायरस के इलाज से संबंधित कोई भी छोटी सी जानकारी जो सरकार की ओर से आई हो हमे काफी राहत पहुचाती है। ऐसी ही एक राहत भरी बात की चर्चा इन दिनों भारत देश मे भी हो रही है । 
             प्लाज़्मा थेरेपी जी हां यही वो इलाज है जो एंटी कोरोना वैक्सीन के अनुपस्तिथि में कोरोना मरीज़ो का इलाज करने में इस्तेमाल किया जाएगा। एक नामांकित न्यूज़ चैनल पर दिखाई गई खबर की माने तो इस थेरेपी द्वारा कोरोना मरीज़ो की जान बचाई जा सकती है। हालांकि डॉक्टर्स का कहना है कि यह कोई सटीक इलाज नही है लेकिन इस थेरेपी द्वारा कोरोना मरीज़ को कोरोना नामक इस बीमारी से लड़ने में मदत जरूर मिलेगी।। 
             केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डाँ.हर्षवर्धन और भारत देश के अलग अलग राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के बीच चर्चा में कोरोना बीमारी का असर जिन राज्यों में सबसे ज्यादा है उन राज्यों ने इस थेरेपी के उपयोग के लिए अनुमति मांगी है। महाराष्ट्र में इस बीमारी के बढ़ते अनुमान को देखते हुये महाराष्ट्र राज्य के खाद्य और औषधि प्रशासन ने मुम्बई के नायर अस्पताल को  इसकी अनुमति दे दी है। मुम्बई के नायर अस्पताल (nair hospital) के डीन डॉ.रमेश भारमल ने एक  न्यूज चैनल से बात करके इस बात की पुष्टी भी की है। 
            उन्होंने न्यूज चैनल से बात करते हुए बताया है कि कॉनवलसेन्ट प्लाज़्मा इस थेरेपी के क्लिनिकल टेस्ट कि शुरुवात हो चुकी है। कोविड-19  पे जीत हासिल करने वाले मरीजों से खून लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कोरोना बीमारी  से पूरी तरह से स्वस्थ हुये लोगो से संपर्क किया जा रहा है। और उनके द्वारा अच्छा प्रतिसाद भी मिल रहा है। कहा जा रहा है की सरकारी अस्पतालों में इस थेरेपी के उपयोग पे 2 से 3 हज़ार तक का खर्चा आ सकता है। 
           भारत देश मे सबसे पहले केन्द्रीय संस्थानों से इसके उपयोग की अनुमति केरल के श्री चित्र तिरुनल इंस्टिट्यूट फ़ॉर मेडिकल सायन्स अँड टेक्नोलॉजी ने मांगी थी उसके बाद दिल्ली और अब (मुम्बई) महाराष्ट्र में भी इसके क्लीनिकल टेस्ट की शुरुवात होने जा रही है।




आइये जानते है आखिर ये प्लाज़्मा थेरेपी है क्या।।
            स्पैनिश फ्लू , सार्स, इबोला जैसी अनेक बीमारियों में इस थेरेपी का इस्तेमाल पहले भी किया गया है। इस थेरेपी में जो भी व्यक्ति कोरोना बीमारी से पूरी तरह स्वस्थ हुआ है । उस व्यक्ति के खून से  प्लाज़्मा में मौजूद एंटीबॉडी को कोरोना मरीज़ के शरीर में डाला जाता है जो मरीज़ के शरीर के अंदर खून में मिलकर एंटीबॉडीज तैयार करता है जो इस कोरोना के संक्रमण को शरीर में फ़ैलने से रोकता है और पर्याप्त एंटीबॉडीज तैयार होने पर यह इस वाइरस को नष्ट भी कर सकता है।।
            इस थेरपी द्वारा कोरोना बीमारी से पूर्ण तरह ठीक हुये एक व्यक्ति के खून से 4 कोरोना ग्रस्त मरीज़ो का इलाज किया जा सकता है। लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि यह थेरेपी कोई रामबाण इलाज नही ये सिर्फ कोरोना मरीजों को इस बीमारी लड़ने के लिए उनके इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। जिसकी वजह से मरीज़ की जान बचने की संभावनायें बढ़ जाती है। लेकिन इसका मतलब ये नही की इससे मरीज़ 100 प्रतिशत ठीक ही हो जायेगा। और ये थेरेपी प्रभावी रूप से उन लोगो के लिये ही उपयुक्त होगी जिन्हें कैंसर, शुगर जैसी बड़ी बीमारियां न हो। इसमे ध्यान देने योग्य बात यह है यह थेरेपी सिर्फ और सिर्फ मरीज़ की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है जो इस बीमारी से लड़ने में काम आती है। लेकिन ये थेरेपी covid-19 पे कोई पूर्णतया कारगर इलाज नही है । भारत देश के साथ साथ अन्य देशों में भी इस थेरेपी के क्लीनिकल टेस्ट शुरू हो चुके है। कहा तो ये भी जा रहा है की इस थेरेपी से चाइना में ५ व्यक्तियों का सफल इलाज हुआ है



इसमे कुछ नियम शर्ते भी है
1) कोरोना से पूरी तरह स्वस्थ हुआ व्यक्ति ही इसके लिए रक्तदान कर सकता है
2) कोरोना बीमारी से लड़कर पूरी तरह स्वस्थ होने के 14 दिन बाद ही डोनर से उनका ब्लड लिया जा सकता है। उसमें भी उनके ब्लडटेस्ट के 2 कोरोना टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही उनका प्लाज़्मा लिया जा सकता है।
3) प्लाज़्मा देने वाला व्यक्ति कम से कम  3 महीने विदेश न गया हो।
4) प्लाज़्मा देनेवाले व्यक्ति को बुखार या सांस की तकलीफ न हो।
            तो इस तरह जब तक एन्टी कोरोना वैक्सिन तैयार नही हो जाती तब तक इस थेरेपी से लोगो की जान बचाने का प्रयास किया जाएगा। बावजूद इसके शंकाएं हमेशा बनी रहती है जब तक की किसी भी बीमारी का सटीक इलाज न मिल जाये। उम्मीद है की इस थेरेपी द्वारा कोरोना बीमारी से लड़कर उसपे जीत हासिल की जाये। लेकिन यह तो आनेवाला वक़्त ही बताएगा की प्लाज़मा थेरेपी से कोरोना मरीजों को वाक़ई कितना फायदा होता है।।  

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